जिस्म की भूख-2

टीचर एंड स्टूडेंट सेक्स कहानी में पढ़ें कि सेक्स कि प्यासी एक कुंवारी लड़की ने अपने ट्यूशन टीचर को सेक्सी हरकतें करने की चूत दे दी. उन दोनों ने सेक्स कैसे किया?

कहानी के पहले भाग
गर्म लड़कियों की जिस्म की भूख
में आपने पढ़ा कि

अब दोनों सहेलियों का एक दूसरी की चूतों की आग बुझाना उन दोनों का एक शगल सा हो गया।

बिना पॉर्न देखे और चूत में कुछ लिए न रूपा सो पाती थी, न मनु!

मनु ने अब अपने पर फैलाने शुरू कर दिये थे।

हालांकि उसकी नानी ने उसकी माँ को उसकी हरकतों के बारे में बता दिया था तो वो भी खूब पाबंदी रखती थीं मनु पर!
पर मनु उन्हें उल्लू बना ही लेती थी।

कुछ इस तरह हायर सेकेण्डरी का डेढ़ साल निकल गया।

अब आगे टीचर एंड स्टूडेंट सेक्स कहानी:

इस बार बोर्ड एग्ज़ाम थे।
मनु को पढ़ने में तेज थी, पर रूपा कमजोर!
अब रूपा को पढ़ाई का होश भी कहाँ था।

उसके अम्मी अब्बू चाहते थे कि बस वो किसी तरह बीए कर ले ताकि उसका निकाह किसी पढ़े लिखे लड़के से हो जाये।
रूपा के कज़िन वगेरह शादी के बाद विदेशों में सेट थे, तो विदेश जाना रूपा का भी सपना था।

अब रूप तो था उसके पास … पर कम से कम बीए की डिग्री तो चाहिए किसी अच्छे लड़के को पटाने के लिए!

प्रैक्टिकल्स में रूपा को अच्छे नंबर दिलवाने के लिए उसके एक टीचर को उसे घर पर पढ़ाने के लिए बुलाया गया।

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रूपा पर उसके अब्बू की पाबंदी थी कि पढ़ाई सिर्फ बुर्के में ही और नीचे बरामदे में होगी।

अब नीचे घर की कच कच में पढ़ाई कहाँ होती … तो रूपा के कहने पर उसकी अम्मी ने उसके अब्बू से ये इजाजत दिला दी कि ठीक है, पढ़ाई ऊपर रूपा के कमरे में हो जाएगी.
पर रूपा की भाभी उतनी देर अपने कमरे में ही रहेंगी ताकि रूपा अकेली न रहे।

टीचर सलीम उसके भाई शफ़ीक़ का जानने वाला था पर था हरामी!

पंद्रह बीस दिन तो वो शराफत से पढ़ाता रहा, इस बीच में प्रेक्टिकल्स की डेट भी आ गईं।

रूपा घबरा रही थी तो उसने सलीम से कहा- सर, आप देख लेना … मुझे कैसे भी प्रेक्टिकल में नंबर पूरे ही चाहिए।
यही बात रूपा के भाई शफ़ीक़ ने अलग से सलीम से कह दी थी कि चाहे कुछ खर्चा हो जाये पर नंबर पूरे आने चाहिए।

सलीम ने इस बात का फायदा उठाकर शफ़ीक़ से रुपए भी ले लिए और रूपा पर हाथ रखना शुरू किया।

उसने एक दिन पढ़ाते पढ़ाते रूपा को धमकाया कि वो मेहनत नहीं कर रही है और वो उसकी शिकायत उसके अब्बू से करेगा।

अब्बू के नाम से रूपा रोने लगी।
शफ़ीक़ ने उसकी नाजुक हथेलियों को पकड़ लिया और कहा- रोओ मत, बस पढ़ाई मन से करो. और वैसे करती रहो जैसा मैं कह रहा हूँ. तो नंबर अच्छे आने की गारंटी है।

बातों-बातों में आँसू पौंछने के बहाने उसने रूपा का नकाब भी हटवा दिया।

रूपा की खूबसूरती उसके पाजामे में टाइट हो गयी थी।

अब सलीम अक्सर रूपा को किसी न किसी बहाने से बेपरदा करवा देता, कभी उसके गालों को सहला देता, कभी उसकी हथेली को पकड़ लेता।

पराये मर्द के स्पर्श से रूपा सिहर जाती पर उसे अच्छा भी लगता।

उसने मनु को बताया तो मनु बोली- सलीम के हाथ में नंबर होते हैं तो उसे पटा कर रख!
मनु तो खुद अब चुदने भी लगी थी होटलों में जाकर!
और उसकी चुदाई के किस्से रूपा की चूत में आग लगा देते।

एक दिन रूपा की भाभी जो पेट से हो गयी थी, को डॉक्टर के दिखाने उसकी अम्मी गयी हुई थीं।
रूपा घर पर अकेली थी।

अम्मी कह गयी थीं कि तू मनु को बुला लेना, जब सलीम आए।
रूपा ने मनु से कह दिया था कि वो शाम को दो तीन घंटे उसके घर पर ही रुके।

मनु ने नया नाटक रचा।
उसने अपने घर पर तो ये कह दिया कि वो स्कूल के बाद रूपा के घर रहेगी और रात तक वापस आएगी।

मनु की मम्मी ने रूपा की अम्मी से इस बाबत पूछ भी लिया था।

स्कूल से वापिस आकर मनु कपड़े बदलकर रूपा के घर के लिए निकली पर नजर बचा कर गली के बाहर खड़ी एक अमीरज़ादे की गाड़ी में बैठ कर रपट ली।
उसने रूपा को बता दिया था।

अब रूपा घर पर अकेली थी जब सलीम सर आए।

सलीम को ये अंदाज हो गया कि आज रूपा अकेली है तो उसने भी सोच लिया कि आज मौका है इसकी कुंवारी बुर फाड़ने का!

पढ़ाई शुरू करते ही सलीम ने रूपा से कहा- आज तुम बुर्का हटा कर पढ़ लो, ताकि अच्छे से पढ़ाई हो जाये।
रूपा का दिल ज़ोरों से धड़क रहा था।

उसने बुर्का उतार दिया और बैठ गयी।
सलीम ने बिना कोई वक़्त गँवाए रूपा से कहा कि उसके प्रेक्टिकल में तो 90 प्रतिशत नंबर उसने करवा दिये हैं और एक्साम में भी वो उसकी मदद करेगा ताकि वो अच्छे नंबरों से पास हो जाये।

रूपा खुश हो गयी और उसने सलीम को शुक्रिया कहा।

सलीम ने पेंतरा फेंका- सिर्फ शुक्रिया? वो भी इतनी दूर से?

रूपा का दिल धड़क रहा था … याल्ला आज न जाने क्या होने वाला है।
उसे मनु का ख्याल आया … काश वो मनु को रोक लेती!

रूपा को ख्याल ये भी आया कि मनु तो इस समय टांगें चौड़ा कर चुदवा रही होगी।

सलीम ने उसके हाथ अपने हाथों में ले लिए और उसे धीरे से खड़ा किया।

रूपा नीचे नजर किए खड़ी थी; सलीम उसके चेहरे से नजर गड़ाए था।
सलीम ने उसकी थोड़ी ऊपर की और कहा कि अगर इजाजत हो तो वो उसके लबों को चूम ले?

रूपा ने शर्मा कर मुंह घुमा लिया और अपने हाथ छुड़ाने की असफल कोशिश की।
सलीम ने उसका चेहरा घुमाया और उसके थरथराते होंठों पर अपने होंठ रख दिये।

याल्ला … कहती हुई रूपा ने उसके काबू से छूटना चाहा पर सलीम की पकड़ मजबूत हो गयी थी।
सलीम ने रूपा को अपनी ओर भींचा तो रूपा ने आत्मसमर्पण कर दिया सलीम के आगोश में समा गयी।

सलीम और उसके होंठ अब फिर मिल गए। सलीम ने उसे कस कर भींच लिया और अपने हाथों से उसकी पीठ को सहलाते हुए उसके नाजुक हिप्स को अपनी ओर खींच लिया।
अब रूपा बेबस थी।

सलीम ने उसका चेहरा फिर ऊपर उठाया और कहा- आज हम दो जिस्म एक जान हो जाते हैं। शायद कुदरत की भी यही मर्जी है तभी उसने हमें ये तन्हाई दी है।

रूपा को सलीम पास पड़े बेड पर ले गया और उसे आहिस्ता से लिटा कर उसके ऊपर चढ़ गया।
रूपा के तमाम डर के बावजूद सलीम के इसरार और चूत में लगी आग के आगे रूपा हार गयी।

दोनों के कपड़े प्याज़ के छिलकों की तरह उतार गए।

सलीम ने नीचे होकर पहले तो रूपा की चूत चूसी और फिर ये अंदाज करते हुए कि टाइम कम है, चूत को थूक से भरकर अपना लौड़ा रूपा की चूत के मुहाने पर रख दिया।

रूपा बोली- सर, मुझे छोड़ दीजिये, मैंने ये पहले कभी नहीं किया. मैं मर जाऊँगी, मैं इतने मोटे को अंदर कैसे लूँगी?
सलीम को अपनी किस्मत पर रश्क हुआ कि उसे आज एक कुंवारी बुर चोदने का मौका मिला है।

उसने रूपा के ऊपर आकर अपना लंड धीरे से रूपा की चूत में सरकाया।

रूपा को दर्द हुआ, वो कसमसाई तो सलीम ने उसके होंठों पर अपने होंठ लगा दिये और एक झटके में उतार दिया अपना मूसल रूपा की अनछुई चूत में!
रूपा दर्द से चीख गयी; उसकी चूत फट गयी थी; खून निकल पड़ा।

पर सलीम ने धक्के लगाने शुरू किए।
अब रूपा को दर्दमिश्रित मजा आने लगा।

पहली बार था, रूपा से बर्दाश्त नहीं हो पा रहा था और असुरक्षित सेक्स होने से गर्भ का भी खतरा हो सकता था तो उसने सलीम का लंड बाहर निकाल दिया।

सलीम ने ज़ोर लगा कर दोबारा अंदर करने की कोशिश की तो रूपा कराह के बोली- बहुत दर्द हो रहा है … और अगर कुछ गलत हो गया तो मेरे भाई और अब्बू हम दोनों को मार ही डालेंगे।

यह सुन सलीम को भी लगा कि अब जाने में ही भलाई है क्योंकि रूपा को अपने को ठीक भी करना है।
सलीम ने फटाफट कपड़े पहने और चला गया।

रूपा से चला भी नहीं जा रहा था।
उसने सोच लिया कि क्या करना है।

रूपा ने फटाफट कपड़े पहने और कमरा ठीक किया।
उसने सैनीटरी नैप्किन लगाया और नीचे जाकर गर्म पानी और टॉवल ले आई।

उसने अपने को इस बहाने के लिए तैयार किया कि अम्मी से वो कहेगी कि उसकी माहवारी शुरू हो गयी है.

अम्मी आयी तो उसने यही बहाना लगाया और कहा- बहुत दर्द हो रहा है इसलिए सिकाई के लिए पानी गर्म किया है और आज सर को पढ़ने के लिए मना कर दिया। तो मनु भी वापिस चली गयी, उसे मार्केट जाना था।

अम्मी ने उसकी बातों पर यकीन कर लिया।
शाम को मनु आई।

कमीनी रूपा की हालत देख कर ही समझ गयी कि आज मुहूर्त हो गया।
उसने रूपा को चूमकर बधाई दी।

रूपा बोली- यार दर्द बहुत हो रहा है, चूत फट गयी है। अब क्या होगा?

मनु बाहर गयी और केमिस्ट से पेनकिलर दवाई लाकर रूपा को दिन और एक नींद कि गोली दी और कहा- रात को हल्दी दूध पी लेना और नींद की गोली खा कर सो जाना।

अगले दो दिन रूपा अपने कमरे से बाहर नहीं आई और भाभी से भाईजान को भी कहलवा दिया कि सलीम सर को महीने के पैसे दे दें और मुझे अब नहीं पढ़ना।

सलीम मिलने भी आया तो रूपा ने एकांत में उससे कह दिया कि उसे कोई शिकायत नहीं है, पर बस अब उसे ये सब नहीं करना।

इसी तरह रूपा की पढ़ाई अपने मुकाम पर पहुंची।

उसने बीए कर लिया और उसका रिश्ता सऊदी में लगे एक डॉक्टर लड़के से हो गया जो उससे उम्र में 15 साल बड़ा था।

लड़के वाले रूपा की अम्मी के मायके के शहर के थे, उन्हें रूपा एक निगाह में ही भा गयी थी।

रूपा के शौहर डॉक्टर खालिद एक शरमीले स्वभाव के नॉन-रोमांटिक शख्सीयत थे।
अपने करियर के प्रति जागरूक थे तो अपना अधिक समय अस्पताल में ही गुजारते।

रूपा की चूत खूब फूंफकारें मारती; रूपा खालिद को खूब रिझाती।
हुस्न भी था और जिस्म भी था!

पर खालिद मियां हफ्ते में एक दो बार चुदाई करके फाइल बंद कर देते।
हालांकि रूपा को वो बेहद प्यार करते थे। रूपा और वो बिस्तर पर एक दूसरे की बांहों में नंगे ही सोते!

पर डॉक्टर साहब मांस वाला मोटा इंजेक्शन केवल हफ्ते में दो बार ही लगाते।

अलबत्ता उन्होंने चूस-चूस कर रूपा के मम्मे भी बड़े कर दिये थे।
रूपा भी उनका लंड खूब चूसती तो इससे बस इतना हो पाता कि हफ्ते में उन दो बार के अलावा रूपा एक-दो बार अपने मुंह से डॉक्टर साहब को खाली कर देती।

फिर डॉक्टर साहब तो सो जाते और रूपा को फिर अपनी चूत में उंगली या खीरा करना पड़ता।

ऐसे ही दो साल निकल गए।

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