जवान लड़कों से चूत गांड फटवायी-3

फीमेल डोमिनेटिंग सेक्स स्टोरी में पढ़ें कि मैंने लोकल बस में चार लड़कों को पटा कर सेक्स के लिए रात में अपने घर बुलाया. मैंने उन चारों के साथ कैसे सेक्स किया?

कहानी के पिछले भाग
दफ्तर में आकर चुद गयी मैं
में आपने पढ़ा कि
मैंने चार लड़कों को अपने घर बुलाया रात में …
दिन में मैंने अपने बॉस से चुदकर अपनी वासना शांत की. घर आकर मैं उन चार लड़कों के साथ सेक्स का मजा लेने के लिए तैयार हो गयी.
सही समय पर चारों आ गये.

अब आगे फीमेल डोमिनेटिंग सेक्स स्टोरी:

यह कहानी सुनें.

मैंने रसोई में से झांक कर देखा कि चारों अपने अपने लंड सहला रहे थे. और शायद वे मेरे बारे में ही बात कर रहे थे.

तभी उनमें से एक लड़का उठकर आया और वह मुझे देखने ही आया होगा.
मैं रसोई में अपना काम करने लगी.

वह आकर पीछे से मुझसे चिपट गया और धीरे से उसने अपना हाथ मेरी गांड पर रख दिया और उंगली को चलाने लगा.
मैंने पलट के उसकी तरफ देखा और स्माइल कर दी.

तभी उसने आव देखा ना ताव … उसने मेरे होंठों को अपने होंठों से मिला लिया और उसने मेरे होंठ चूसने शुरू कर दिए.
एक हाथ से वह मेरे बूब्स दबाने लगा.

उसको देख कर देख बाकी तीनों लड़के भी रसोई में आ गए.
अब मैं चारों के बीच चिपकी हुई थी, कोई मेरे होंठ चूस रहा था तो कोई मेरे बूब्स को दबा रहा था.

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मुझसे भी कंट्रोल करना बहुत मुश्किल होता जा रहा था.

तभी विशाल ने मेरी ड्रेस उतार दी.
अब मैं उन सबके सामने सिर्फ ब्रा और पेंटी में रह गई थी.
मेरी ब्रा पेंटी देखकर बो लोग मेरी तारीफ करने लगे.

वाकयी में मैं उस समय बहुत खूबसूरत लग रही थी.

तभी विशाल ने मेरे बूब्स पर कब्जा कर लिया और ब्रा के ऊपर से मेरे बूब्स दबाने लगा.
अमित नीचे बैठकर मेरी गांड काट रहा था.
और साहिल मेरी पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत को खा जाने को तैयार था.

राज सिर्फ मेरे होंठ चूसे जा रहा था. वह मेरे लबों को ऐसे चूस रहा था जैसे उसे आज के बाद कभी कोई लड़की मिलेगी ही नहीं!
उनका उतावलापन देखकर मैं समझ गई थी कि यह इन चारों का पहली बार है.

तभी मैंने उन चारों को रोक दिया और उनसे कहा- बस बस … इतने उतावले हो जाओगे तो पैन्ट में ही झड़ जाओगे. फिर मेरी प्यास कौन बुझायेगा.
यह सुनकर वे चारों मुझसे अलग हो गए.

फिर मैं धीरे से राज के पास गई और पैंट के ऊपर से ही उसका लंड सहलाने लगी.

मैंने एक हाथ से राज का और एक हाथ से विशाल का लंड पकड़ लिया.
फिर मैंने उनको बोला- अपने अपने कपड़े उतार कर नंगे हो जाओ.
मेरा इतना कहना था कि वे चारों गोली की स्पीड से नंगे हो गए.

उनके लंड सामान्य आकार के ही थे लगभग 6 इंच के करीब … लेकिन सबसे लंबा लंड साहिल का था जो करीब साढ़े छह से सात इंच तक का रहा होगा.
मैंने साहिल और राज का लंड पकड़ लिया और उनको अपने पीछे खींचने लगी जैसे कि वे मेरे कुत्ते हों.

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अब अमित और विशाल मेरे अगल बगल चल रहे थे, वे कभी मेरे बूब्स दबा देते, कभी मेरी गांड दबा रहे थे.
मैं उनको देखकर बोली- कुत्तो, आज तुम सिर्फ मेरे कुत्ते और मैं तुम्हारी मालकिन हूँ. आज मैं तुम्हें जन्नत की सैर दिखाऊंगी.

उन चारों के चेहरे पर चमक आ गई.
मैंने भी सोचा कि आज कुछ डोमिनेटिंग सेक्स करना चाहिए.

मैं उन चारों को अपने बेडरूम में ले आई और उनको बिस्तर पर लेटने को बोली.
चारों बस आज्ञाकारी शिष्यों की भान्ति जाकर बिस्तर पर लेट गए.

फिर मैंने उन चारों को पेट के बल उल्टा लेटने को कहा.
वे तो बस जैसे आज मेरे गुलाम बन चुके थे, जैसा मैं कह रही थी वे तुरंत वैसा कर रहे थे.

चारों पेट के बल लेट गए, उनकी गांड अब हवा की तरफ मुंह किए हुए थी. उन चारों की गांड काफी अच्छी लग रही थी.
चारों गोरे चिट्टे लड़के थे, उनकी तो ठीक से दाढ़ी भी नहीं आई थी और चारों ने अपनी झांटें साफ कर रखी थी.
लगता था कि चारों ने आपस में एक राय बना कर आप मुझे चोदने के लिए झांटें साफ़ की होंगी.

फिर मैंने अपनी अलमारी में से एक बेल्ट निकाली और उनके पास गई.

राज सबसे कोने में लेटा हुआ था. मैंने उसकी गांड पर बेल्ट जोर से मारी तो उसके मुंह से बहुत जोर की चीख निकली.
उसे शायद इस हमले का अंदाजा नहीं था.

राज को तड़पता हुआ देखकर साहिल अमित और विशाल की भी सांस अटक गई, वे उठने लगे तो मैंने उनको आदेश दिया- कुत्तो, लेटे रहो. आज तुम्हारी मालकिन तुम्हारी मां चोद देगी.
वे तीनों ऐसे ही लेट गए.

फिर मैंने विशाल की गांड पर बेल्ट मारी.
वह भी ऐसे तड़प गया.

उन्हें ऐसे तड़पता देखकर मुझे बहुत मजा आ रहा था क्योंकि मैं जानती थी कि ये लोग जितना ज्यादा तड़पेंगे, उतना ज्यादा मुझे तड़पा तड़पा कर चोदेंगे.

फिर मैंने अमित की गांड पर बेल्ट मारी.
वह कुछ ज्यादा ही उछल गया. शायद मैंने थोड़ा ज्यादा तेज मार दिया था.

अमित अपनी गांड पकड़ कर रोने लगा.
तभी मैं उसके पास गई और उसके होंठों पर एक जोर का किस किया और कहा- जाकर चुपचाप अपनी जगह पर लेट जाओ.

वह किस पाकर शायद अपना दर्द भूल गया और वह जाकर लेट गया.

फिर मैंने साहिल की गांड पर भी जोर से बेल्ट मारी.
मुझे उनको तड़पता हुआ देख कर बहुत मजा आ रहा था.

फिर मैंने उन चारों के हाथ, पैर को अपने बेड से बांध दिया और मैं धीरे-धीरे उनके शरीर के हर कोने पर बेल्ट से मारने लगी.

वे लड़के अब रोने लगे, धीरे-धीरे चीख भी रहे थे.
लेकिन जो भी ज्यादा चीख रहा था, मैं उसके पास जाकर उसको किस कर देती थी, उसका लंड पकड कर सहला देती थी तो वह चुप हो जाता था.

थोड़ी देर ऐसे ही मार खाने के बाद विशाल बोला- मैम, अब आप हमें छोड़ दो. वरना हमारी गांड फट जाएगी.
मैं बोली- बेटा आज का सेक्स तुम लोग जिंदगी भर याद रखोगे. अभी तो मैं तुम्हारी चारों की गांड मारूंगी.

यह सुनकर तो उन चारों की सच में ही गांड फट गई.
राज बोला- साली बहन की लोड़ी … तेरी मां की चूत … मादरचोद … हमारे हाथ पैर खोल कर देख, तेरी कैसी मां चोदते हैं. भोसड़ी वाली एक हफ्ते तक ठीक से चल भी नहीं पाएगी. तेरे मुंह में लंड दे देंगे … तेरी मां चोद देंगे … तेरी बहन चोद देंगे!

और पता नहीं राज ने गुस्से में क्या-क्या कहा.
मैं बस उन चारों के मुंह से यही सुनना चाहती थी.

मुझे अच्छा लगा कि उन चारों में जोश आ रहा है.

तभी मैंने राज के पास जाकर उसके टट्टे दबा दिए.
वह जोर से चीखा.

फिर मैंने कहा- क्यों बहन के लोड़े … माँ चुद गयी ना … क्या तेरे लंड में इतना दम है कि तू मेरी प्यास बुझा सके?
साहिल बोला- मां की चूत तेरी … बहन की लोड़ी … हमें छोड़ कर तो देख … फिर बताते हैं तुझे हम!

फिर मैंने उसका लंड सहला दिया और उसके होंठों पर किस करना शुरू कर दिया.
शायद राज कुछ ज्यादा ही गुस्से में आ गया था, किस करते करते उसने मेरे होंठो को काट लिया जिससे कि उसमें से हल्का खून भी आने लगा.

अब मुझे खुद गुस्सा आ गया तो मैंने उसकी गांड पर बहुत जोर से बेल्ट मारी तो वह बहुत बुरी तरीके से तड़प गया.
वह फिर से मुझे गालियां देने लगा- बहन की लोडी छोड़ दे … वरना तेरी मां चोद देंगे.

उन चारों के मुंह से एक जैसे ही शब्द निकल रहे थे, चारों मुझे गालियां दे रहे थे और छोड़ने के लिए कह रहे थे.

फिर मैंने सोचा कि अभी इन्हें छोड़ने का टाइम आ गया है.
लेकिन फिर मैंने यह भी सोचा कि मैंने इन चारों को एक साथ छोड़ दिया तो ये मेरी बेढंग से गांड फाड़ देंगे.
तो मैंने तय किया कि पहले राज को रिहा किया जाए.

मैंने राज के पैर खोल दिए तो वह पैर चलाने लगा.
फिर मैंने उसके हाथ भी खोल दिए.

जैसे ही वह खुला, उसने तुरंत उठते ही मेरे बाल पकड़ लिए और मेरे होंठों पर किस करना शुरू कर दिया और अपने हाथ से मेरे को बहुत जोर जोर से दबाने लगा.

तब विशाल बोला- साले हमारे हाथ भी तो खोल!
वह विशाल की तरफ जैसे ही मुड़ा, मैंने उसको रोक दिया.
मैंने कहा- पहले तू अपनी मर्दानगी दिखा मुझे!

यह सुनकर उसका तो शायद जैसे अंदर को मर्द ही जाग गया.
उसने तुरंत मेरी ब्रा फाड़ दी और मुझे उल्टा करके मेरी पैंटी भी निकाल कर मुझे पूरी तरीके से नंगी कर दिया और मेरी गांड पर बहुत जोर से थप्पड़ मारने लगा.

मुझे मेरी गांड पर थप्पड़ मारने वाले मर्द बहुत पसंद आते हैं. मुझे ऐसे अपनी गांड पर थप्पड़ खाना बहुत पसंद है.

इसके बाद वह एक कुर्सी पर बैठ गया. उसने मुझे अपनी जांघों पर उल्टा लिटा दिया और मेरी गांड पर जोर से थप्पड़ मारने लगा.
अपना दूसरा हाथ नीचे ले जाकर वह मेरे बूब्स दबाने लगा.

इसके बाद उसने अपनी तीन उंगलियाँ सीधे मेरी चूत में उतार दी.
मेरी चूत अब तो बहुत ज्यादा फैल चुकी थी तो मुझे जरा सा भी पता नहीं चला.
लेकिन उसके इस तरीके से करने से मुझे मजा बहुत आया.

फिर मैंने देखा कि बाक़ी तीनों लड़के हमें ही देख रहे थे.
वे राज को बोल रहे थे- वाह राज … इसकी चूत में पूरा हाथ डाल दे! इस बहन की लोड़ी को आज इतना तड़पा तड़पा कर चोदना है कि सात जन्म तक हमें याद रखेगी.

उनकी ये बातें राज को उकसा रही थी और वह जोर-जोर से मेरी गांड पर थप्पड़ मारे जा रहा था.

उसने थप्पड़ मार मार कर मेरी गांड लाल कर दी थी.

तब उसने मुझे सीधी खड़ी किया और सीधे मेरे बूब्स को चूसना शुरु कर दिया.
वह मेरे निप्पल को काट रहा था; मुझे दर्द भी हो रहा था.
लेकिन उस दर्द में मुझे मजा भी बहुत आ रहा था.

तब भी साहिल ने बोला- साले अब हमारे हाथ भी खोल दे!

राज ने मेरी तरफ देखा तो मैंने उसको इशारे से मना कर दिया.
मैंने उसके कान में कहा कि मैं चाहती हूं कि तुम इन तीनों के सामने मुझे चोदो. मैं देखना चाहती हूं कि इन तीनों की हालत मुझे चोदते हुए देखकर कैसी होगी.

वह हंसने लगा और मेरे होंठों पर किस करने लगा. वह बहुत जोर जोर से मेरे बूब्स दबा रहा था, किस करते करते वह मेरी गांड पर थप्पड़ भी मार रहा था.
हम दोनों नंगे उन तीनों के सामने खड़े खड़े ये सब कुछ कर रहे थे.

फिर मैंने हाथ नीचे ले जाकर राज का लंड पकड़ लिया और उसको सहलाने लगी.
उसका लंड एकदम गोरा सा था

तभी राज ने मेरा सिर पकड़ कर मुझे नीचे बैठा दिया.
मैं उसका इशारा मैं समझ गई थी कि मुझे उसका लंड चूसना है.

मैंने लंड चूसने में देरी न करते हुए तुरंत उसका लंड मुंह में ले लिया और चूसना शुरू कर दिया.
मुझे लंड चूसती हुई को देखकर उन तीनों की हालत बहुत खराब हो गई थी.

मैंने देखा कि अमित की हालत तो उन तीनों में सबसे ज्यादा खराब हो गई थी.
वह तो बेड पर ही झटके देने लगा जैसे उसके नीचे कोइ लड़की हो और वह उसे चोद रहा हो.

उन तीनों की हालत देखकर मुझे बहुत मजा आ रहा था.

फिर मैंने भी राज का लंड छोड़कर उसके टट्टे चाटने शुरू कर दिए. उसके टट्टे एकदम चिकने सफेद थे, उस पर जीभ चलाने में मुझे बहुत मजा आ रहा था.

मैंने मुंह ऊपर करके देखा तो राज की हालत बहुत खराब हो गई थी. मुझे लगा कि शायद यह झड़ने वाला है.

तभी उसने दोनों हाथ से मेरा सर पकड़ लिया और अपना लंड मेरे मुख में डाल दिया और जोर से धक्के देने लगा.
मैं समझ गई कि अब यह झड़ने वाला है.

मैंने सोचा कि चलो एक का काम तो जल्दी खत्म होगा.
तभी उसने जल्दी जल्दी झटके देने शुरू कर दिए और लगभग 30 सेकंड बाद उसने अपना सारा पानी मेरे मुंह में निकाल दिया.
मैं उसका सारा पानी पानी पी गई.

झड़ते ही वह तो एक कुर्सी पर ऐसे बैठ गया जैसे कि उसकी सारी जान निकल गई हो.
मैं खड़ी होकर बोली- क्यों बे साले … तू तो बहुत बड़ा मर्द बन रहा था. तू तो मेरे मुंह में ही झड़ गया. अभी तो मेरी चूत और गांड बाकी हैं!

मेरे प्यारे पाठको, कैसी लग रही है मेरी फीमेल डोमिनेटिंग सेक्स स्टोरी?
आप अपने विचार मुझे [email protected] पर मेल करें.
धन्यवाद

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