दोस्त की दीदी मेरे लंड की दीवानी

सेक्स विद हॉट सिस्टर स्टोरी में पढ़ें कि कैसे मेरी दोसरी मेरे दोस्त की बहन से हुई. वो मुझे अपनी हॉट पिक्स भेजने लगी. इसके बाद सेक्स चैट और फिर चुदाई तक कैसे पहुंचे हम!

नमस्कार दोस्तो, मैं आपका अपना प्रकाश सिंह, मेरी पिछली कहानी थी:
देवर से लेकर वर की भूमिका तक

अब मैं सेक्स विद हॉट सिस्टर स्टोरी के साथ हाजिर हूँ.
दरअसल ये सेक्स कहानी मेरी और मेरे दोस्त के दीदी की है, जिसमें मैं आपको बताऊंगा कि मैंने उसे कैसे चोदा.

मैं सबसे पहले अपने दोस्त की दीदी का नाम और फिगर बता देता हूं.
उनका नाम गुलशा है और उसका फिगर 32-28-34 का है. इस सेक्सी बदन के साथ साथ गुलशा दीदी बहुत गोरी भी हैं और उनका फेस कट भी बहुत खूबसूरत है. दीदी मुझसे चार साल बड़ी हैं.

दरअसल इस कहानी की शुरुआत इंस्टाग्राम से हुई थी.
एक दिन मैंने अपने इंस्टा अकाउंट में देखा कि एक इंस्टा की तरफ से दिए जाने वाले सजेशन में एक खूबसूरत लड़की दिख रही है.

मैंने उसे रिक्वेस्ट भेज दी. उसने भी तुरंत एक्सेप्ट कर ली.
मुझे समझ नहीं आया कि इतनी जल्दी कोई कैसे एक्सेप्ट कर सकता है, वो भी बिना जान पहचान के.

तब मैंने ध्यान से उस लड़की की प्रोफाइल देखी तो पाया कि ये मेरे दोस्त की दीदी हैं.
मैंने उन्हें हाय का मैसेज भेजा, तो उनका भी हाय में रिप्लाई आ गया.

उन्होंने मुझे पूछा- कैसा है और क्या कर रहा है?
मैंने भी उनके बारे में पूछा, अपने दोस्त के बारे में पूछा.

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थोड़ी देर उनके साथ मेरी ऐसे ही बात चली.

अब जब भी मैं ऑनलाइन रहता, वो भी ऑनलाइन रहती थीं. हम दोनों की मैसेज में बात हो जाती थीं.

एक दिन मैंने उनसे उनका नंबर मांगा. उन्होंने बिना कुछ पूछे तुरंत अपना नंबर भेज दिया और कहा कि मुझे भी तू अपना नम्बर भेज देना.

मैंने भी हां कह दिया. मैंने उसी समय आपने फोन से उनका नम्बर डायल करके उन्हें अपना नम्बर दे दिया. अब हम दोनों व्हाट्सैप से भी जुड़ गए थे.

एक दिन मैंने देखा की उन्होंने इंस्टा में अपनी एक पिक्चर को शेयर किया है, जिसमें वो जिम के ड्रेस में थीं.
मैंने उनकी इस पिक को लाइक किया और हॉट के इमोजी भेज दिए.

कुछ देर बाद उनका थैंक्यू का मैसेज आया और थोड़ी देर बाद व्हाट्सैप मैसेज में कहा- क्या मैं सच में इतनी हॉट लग रही हूँ!
तो मैंने भी कह दिया कि हां बहुत ज्यादा … अगर आप मेरे दोस्त की दीदी नहीं होतीं, तो मेरी जीएफ़ होतीं.

उन्होंने थैंक्यू कहा और पूछा- क्या तेरी कोई जीएफ नहीं है?
मैंने कहा- नहीं.
दीदी ने कहा- तो मुझे ही अपनी जीएफ बना ले.

ये कह कर वो हंसने लगीं.
मैंने उनकी बात को नजरअंदाज कर दिया.

अब ये सिलसिला चालू हो गया था. वो पिक्चर शेयर करतीं और मैं कमेंट करता.
वो हर बार पूछतीं और मैं हर बार वैसा ही जवाब दे देता.

अब तो आलम ये हो चला था कि वो पर्सनली मुझे अपनी हॉट इमेज भेजने लग गयी थीं और मैं खुल कर उनकी तारीफें किया करता था.

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ऐसा ही सिलसिला चलता रहा और पता ही नहीं चला कि कब हम दोनों एक दूसरे के एकदम करीब आ गए.

मतलब हम दोनों इतने ज्यादा करीब आ गए थे कि एक दिन वो मुझे प्रपोज़ करने लगीं.

मैंने उनसे कहा- आप मेरे दोस्त की दीदी हैं और मैं कैसे आपको ..
तब उन्होंने कहा- दोस्त की दीदी को हॉट बोलते समय शर्म नहीं आयी तुझे … बड़ा आया आदर्शवादी!
ये कह कर दीदी ने गुस्से से फ़ोन रख दिया.

मैंने उनका नंबर बहुत ट्राई किया, पर वो मेरा कॉल उठा नहीं रही थीं.

कुछ देर बाद उन्होंने कॉल उठाया तब मैंने उन्हें कहा- गुलशा आई आल्सो लव यू.
मेरी इस बात से वो खुश हो गयीं और उन्होंने कहा- मैंने तुम्हारे लिए और बहुत सारी पिक ली हैं … क्या मैं भेजूं!
मैंने हां कहा.

लेकिन दोस्तो … जब उन्होंने अपनी एक पिक भेजी, तो मैं उन्हें देख कर दंग रह गया. वो पिक केवल ब्रा और पैंटी में थीं.

मैंने उन्हें कहा- ये सब क्या है?
तो उन्होंने कहा- कैसी लग रही हूँ मैं … ये सैट नया लिया है सिर्फ तुम्हारे लिए.
मैंने कहा- मेरे लिए मतलब?
तो उन्होंने कहा- हम हमेशा ऐसे थोड़े रहेंगे … थोड़ा रोमांस भी तो करेंगे.

क्या बताऊं दोस्तों वो ब्रा और पैंटी की पिक धीरे धीरे कब ट्रांपेरेन्ट ब्रा और पैंटी में बदल गयी और न जाने कब दीदी के पिक एकदम न्यूड पिक में बदल गए, पता ही नहीं चला.

इसके साथ ही न जाने कब हमारे फ़ोन की बातें फ़ोन सेक्स में बदल गईं, कुछ होश ही नहीं रहा.
अब तो आलम ये था कि एक भी दिन ऐसा नहीं होता था, जब वो मुझे न्यूड पिक न भेजें … और फोन सेक्स न करें.

अब बैचेनी इतनी बढ़ गयी थी कि हम दोनों को लगने लगा था कि कब एक दूसरे से मिल जाएं. हम दोनों से ही रहा नहीं जा रहा था.

एक दिन उन्होंने कहा- अब बस मुझे नहीं पता कि हम कैसे मिलेंगे, लेकिन हम मिलेंगे और मुझे तुमसे चुदना है बस.

दीदी ने मुझसे चुदने की बात साफ़ कह दी थी. मैं भी दीदी को चोदने के लिए गर्मा गया था.

हम दोनों उनके घर पर तो मिल नहीं सकते थे … क्योंकि मेरा दोस्त घर में था.

फिर हम दोनों ने तय किया कि हम अपनी पहली चुदाई होटल में करेंगे. होटल भी शहर के पास रायपुर के किसी होटल में करेंगे.

इसके लिए मैंने उनसे कहा कि वो रायपुर जाने के लिए अपने घर वालों से कुछ बहाना बना लें.

उन्होंने वैसे ही किया. उन्होंने किसी एग्जाम के लिए तीन दिन तक रायपुर में अपनी सहेली के घर रुकने की कह दी और अपनी सहेली से कह दिया कि घर से कोई फोन आए, तो बता देना कि मैं तेरे घर पर ही हूँ.

वो भी सारा खेल समझ गई थी.
लेकिन आप तो जानते ही हैं कि फ्रेंड्स तो कमीने होते ही हैं. सब कुछ सैट हो गया.

हम दोनों रायपुर पहुंच गए. वहां 3 दिन के लिए एक रूम बुक कर लिया.

जैसे ही हम रूम में पहुंचे, वो मुझ पर टूट पड़ीं और मुझे बेतहाशा चूमने लगीं. मेरे होंठों पर अपने होंठ चिपका दिए और चाटने चूमने लगीं.
मैं भी उनके होंठों का रस पीने लगा.

तभी दीदी ने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी और वो मेरी जीभ से जीभ लड़ाने लगीं.
मुझे भी दीदी की मुँह की गर्मी ने बेहाल कर दिया और मैंने उनकी एक चूची पकड़ कर मसलते हुए उनकी जीभ को चूसना शुरू कर दी.

मैंने उनकी चूची को मसला, तो उन्होंने अपने हाथ से मेरे लंड को पकड़ लिया. मैंने उनके टॉप को ऊपर कर दिया.
एक पल के हम दोनों का चुम्बन टूटा और मैंने उनके टॉप को उनके बदन से अलग कर दिया और मैं फिर से उनके होंठों को चूसने लगा.

उन्होंने भी उसी पल मेरी शर्ट के बटन खोल दिए और शर्ट को अलग कर दिया.

धीरे धीरे करके दीदी ने मेरे सारे कपड़े उतार दिए और ऊपर से नीचे तक चाटने लगीं.
वो अपने घुटनों के बल बैठ गईं और मेरे लंड को पकड़ कर हिलाने लगीं.

मेरा लंड इस समय खूंखार हो उठा था. मैं रायपुर आने से पहले अपने लंड की झांटें साफ़ करके आया था. एकदम चिकना और खासा मोटा लम्बा लंड देख कर दीदी से रहा नहीं गया.

उन्होंने लंड के सुपारे पर चढ़ी चमड़ी को पीछे किया और गुलाबी सुपारे को आजाद किया. फिर एक बार जीभ से सुपारे को चाटा और मेरी आंखों में देखा. मेरी आंखें इस समय किसी मदमस्त शिकारी की आंखों से नशे में बोझिल थीं.

देखते ही देखते दीदी ने मेरे लंड को मुँह में ले लिया और उसे चूसना आरम्भ कर दिया.
कुछ ही देर में दीदी इतने जोर जोर से लंड चूस रही थीं कि लंड चूसने की आवाज रूम में गूंज रही थी.

साथ ही मेरी मादक आहें भी दीदी के जोश को बढ़ा रही थीं.
वो मेरे लंड के आंडों को सहलाते हुए लंड को गले तक ले जा रही थीं.

मैंने समझ लिया था कि दीदी चुदी चुदाई माल हैं. लेकिन मुझसे इससे क्या … मेरे लंड के लिए दीदी की मस्त चुत चुदने को रेडी थी.

कुछ देर बाद मैंने उन्हें उठाया और उसके लोअर को निकलने की कोशिश की.
लेकिन वो इतना चुस्त था कि उतर ही नहीं रहा था.
मैंने दीदी को लिटाया और उनकी चुत के पास हाथ लगा कर उस लोअर को पकड़ कर फाड़ दिया.

अब वो मेरे सामने ब्रा पैंटी में थीं.
मैंने दीदी की ब्रा पैंटी को खोल कर उनके तन से अलग दिया और दीदी को पूरी नंगी कर दिया.

अब मेरे सामने दीदी के एकदम टाइट 32 इंच के बूब्स खुले थे. नीचे चुत भी सफाचट थी.

मैंने पहले दीदी के मम्मों पर हमला किया. उनके एक दूध को अपने मुँह लेकर चूसने लगा और दूसरे को दबाने लगा.
फिर मैंने दीदी को घुटनों के बल बैठा दिया और लंड उनके हाथ में देकर चूसने का इशारा किया.
वो मेरे लंड को बड़े इत्मिनान से चूसने लगीं.

थोड़ी देर बाद मैंने उन्हें घुमा कर घोड़ी बना दिया और उनकी गांड के छेद के पास अपना लंड टच कर दिया.

जैसे ही दीदी को लंड का अहसास हुआ तो वो एकदम से तड़पने लगीं.
दीदी बोलीं- पहले एक बार मेरा काम उठा दे … बाद में मस्ती करेंगे.

मगर मैं थोड़ी देर दीदी को तड़पाता रहा.

इसके बाद मैंने उन्हें बेड में पटक दिया और पैर फैला कर चुत में लंड डालने लगा.

दीदी की चुत बड़ी टाईट थी. मैंने देखा कि जिसे मैं चुदी चुदाई आइटम समझ रहा था, वो तो वर्जिन निकली.
मेरा लंड चुत में अन्दर नहीं जा रहा था, बार बार फिसल रहा था.

दीदी हंसने लगी थीं, उन्हें लगा कि मैं अनाड़ी हूँ.

मैंने उन्हें कसके पकड़ा और चुत की फांकों में लंड सैट करके एक जोर का शॉट दे मारा.
इससे मेरा थोड़ा सा लंड चुत के अन्दर घुस गया.

वो दर्द से चिल्लाने लगीं- आह मर गई … बाहर निकाल ले.
मगर अब मैं कहां लंड निकालने वाला था. मैंने ऐसे ही लंड फंसाए रखा और दीदी के होंठों को, मम्मों को चूमने लगा, सहलाने दबाने लगा.

फिर कुछ देर ऐसे करने के बाद मैंने एक और धक्का मारा, जिससे मेरा लंड चूत को चीरते हुए अन्दर चला गया.
दीदी की चुत की सील टूट गई थी और वो तेज तेज रोने लगी थीं.

मगर मैंने समझ लिया था कि दीदी के दर्द को अगर खत्म करना है तो धकापेल मचानी ही होगी.

अब मैं अपनी स्पीड और बढ़ाने लगा और कुछ ही देर में चुत ने लंड को स्वीकार कर लिया.
दर्द खत्म हुआ और अब उन्हें भी चुदाई में मजा आने लगा. दीदी भी अपनी गांड उठाते हुए मेरा साथ देने लगीं.

ताबड़तोड़ चुदाई हुई और मैंने दीदी की चुत में अपने लंड का शीरा टपका दिया.

हम दोनों चिपक कर लेट गए और एक दूसरे की सांसों को शांत करने के लिए सहलाने लगे.

दूसरी बार का राउंड और भी जोरदार हुआ. दूसरी बार में बीस मिनट तक दीदी को चार आसनों में चोदा.

इसी तरह से उन तीन दिनों में मैंने दीदी को हर एक पोज में चोदा.

चुदाई के बाद हम दोनों वापस घर आ गए.

अब जब भी मेरे दोस्त के घर कोई नहीं होता तो मैं उसके घर जाकर उसकी ही बहन को चोद कर आता हूं.

मेरे दोस्त की दीदी की अब शादी हो गयी है. उसका एक बच्चा है, जो कि मेरा है. अब भी सेक्स विद हॉट सिस्टर होता रहता है, वो मुझसे चुदती हैं.

वो कहती हैं कि मुझे न जाने कैसा नामर्द पति मिला है. जब तक मैं तुझसे नहीं चुद लेती, मुझे अच्छा ही नहीं लगता है.

फ़िलहाल की सेक्स कहानी में इतना ही, आगे मेरी सेक्स कहानी जारी रहेगी. उसमें मैं दीदी के साथ हुई चुदाई में क्या कुछ और हुआ, वो लिखूंगा.
तब तक के लिए विदा दोस्तो.
मुझे मेरी सेक्स विद हॉट सिस्टर स्टोरी के लिए मेल करना न भूलें.

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